मैं ने खुशी को चुना
बस यूँ ही
अंदाज़ा नहीं था
खुशी क्या है
कभी प्यार में खुशी मिली
तो कभी दौलत में
दोस्तों में भी काफी खुश था मैं
अपनी ताकत को भी
मैं ने खुशी ही समझा
और फिर एक एक करके
सब कुछ चले गये
पहले दौलत, फिर दोस्त,
फिर ताकत, आखिर में प्यार
अब मैं और मेरी तन्हाई
खुशी को ढूंढ रहे हैं |
कर्नल रमेश रामकृष्णन
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